7607529597598172 हिंदी पल्लवी: प्रथम उड़ान

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

प्रथम उड़ान


आशाओं के  पंख  लगा  कर
जब  प्रथम  उड़ान  सजाते।

आसमान  के  सातों  रंग,
चुरा  आंखों में  समाते।

चंदा  की  शीतलता  मानो,
माथे पर  थम  जातीं।

सूरज की  प्रथम  किरण,
मुखमंडल  पर  फूटी  आतीं।

कभी - कभी  घनेरे  बादल,
किरणों  को  ढक  लेते।

पुनः हठीली  चंचल  किरणें,
चेहरे  को  जगमग  करतीं।

गंतव्य  पाते ही  ये  सगर्व,
यूँ  गर्दन  उचकाते।

मानो  जीत  लिया  जग  सारा
फूले  नहीं समाते


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