7607529597598172 हिंदी पल्लवी: सितंबर 2017

शनिवार, 2 सितंबर 2017

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सूचनाओं, संदेशों और ज्ञान के
समुद्र के अंदर छोड़ दिये गये हैं हम आज

लहरों के समान हर बार ये उठाते हैं ये ऊपर
पर परिणति किनारों पर दम तोड़ना ही है

नमकीन, खारे पानी का स्वाद अंदर की
उबकाइयों को बाहर खींच लाता है

हृदय में तो मीठा स्रोता बहता है पर
नमकीनियत चखने को लाचार हैं

जब भी  घुलती है मिठास मीठी लहर की
हृदय समानता की ओर वेग से बहता है। 


पल्लवी गोयल 
चित्र साभार गूगल