अबीर गुलाल हाथ में लई के
फिर मारी पिचकारी।
कान्हा तू बच न सके अब
हेठ धरी रख सारी।
मात यशोदा ,नंद बाबा की
आड़ भले रख भारी।
राधा रंग रंगेगा साँवरे
हूँ मैं तेरी प्यारी।
ढोल, बाजा ,मृदंग बाजे ।
शोर बड़ा है भारी ।
गोप गोपिन भागे यहाँ वहाँ
होड रंगन की सारी।
दूध दही भी हुई रंगीली
ये उजली बेचारी।
प्यारो रंग में मोहे भी रंग लो
बनाओ अपनी दुलारी।
कान्हा जी के रंग में रंगी रंगीली होली का हार्दिक शुभकामनाएँ।
पल्लवी गोयल
चित्र साभार गूगल

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