7607529597598172 हिंदी पल्लवी: लाइक

शनिवार, 2 सितंबर 2017

लाइक




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सूचनाओं, संदेशों और ज्ञान के
समुद्र के अंदर छोड़ दिये गये हैं हम आज

लहरों के समान हर बार ये उठाते हैं ये ऊपर
पर परिणति किनारों पर दम तोड़ना ही है

नमकीन, खारे पानी का स्वाद अंदर की
उबकाइयों को बाहर खींच लाता है

हृदय में तो मीठा स्रोता बहता है पर
नमकीनियत चखने को लाचार हैं

जब भी  घुलती है मिठास मीठी लहर की
हृदय समानता की ओर वेग से बहता है। 


पल्लवी गोयल 
चित्र साभार गूगल 

6 टिप्‍पणियां:

  1. हृदय में तो मीठा स्रोता बहता है पर
    नमकीनियत चखने को लाचार हैं
    . एकदम समसामयिक और सटीक. वाह 👏 👏

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  2. वाह ... हर छंद सुन्दर है ... सामयिक बात कहता हुआ ...

    जवाब देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात
    बेहतरीन
    गूगल फॉलोव्हर गेजेट लगाइए
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपके अमूल्य सुझाव और प्रोत्साहन के लिए हृदय से आभार है। आदरणीया यशोदा जी ।

      हटाएं